(N/A) एरोमैटिकता चक्रीय,समतलीय,संयुग्मित प्रणालियों का एक गुण है जो $\pi$ इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकरण के कारण अतिरिक्त स्थिरता प्रदर्शित करती है।
$(a)$ यौगिक में एरोमैटिक गुण के लिए आवश्यकताएं:
$(i)$ यौगिक की संरचना चक्रीय होनी चाहिए।
$(ii)$ चक्रीय यौगिक समतलीय होना चाहिए।
$(iii)$ वलय में $\pi$ इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण विस्थानीकरण होना चाहिए।
$(iv)$ वलय में $(4n+2) \pi$ इलेक्ट्रॉन होने चाहिए,जहाँ $n$ एक पूर्णांक है $(n=0, 1, 2, \dots)$। इसे हकल नियम कहा जाता है।
$(b)$ हकल का नियम: एक समतलीय,चक्रीय,पूर्णतः संयुग्मित प्रणाली एरोमैटिक होती है यदि इसमें $(4n+2) \pi$ इलेक्ट्रॉन हों।
$(c)$ उदाहरण:
$(i)$ $1$ वलय: बेंजीन $(C_6H_6)$। यह चक्रीय,समतलीय है और इसमें $6 \pi$ इलेक्ट्रॉन होते हैं ($n=1$,$4(1)+2=6$)।
$(ii)$ $2$ वलय: नेफ़थलीन $(C_{10}H_8)$। यह चक्रीय,समतलीय है और इसमें $10 \pi$ इलेक्ट्रॉन होते हैं ($n=2$,$4(2)+2=10$)।
$(iii)$ $3$ वलय: एंथ्रासीन $(C_{14}H_{10})$। यह चक्रीय,समतलीय है और इसमें $14 \pi$ इलेक्ट्रॉन होते हैं ($n=3$,$4(3)+2=14$)।
साइक्लोपेंटाडाइनाइल एनायन भी एरोमैटिक है क्योंकि इसमें $6 \pi$ इलेक्ट्रॉन होते हैं ($4$ दो द्वि-आबंधों से और $2$ कार्बन परमाणु पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म से)।